वीर शंभुधन फुंगलो (1850–1883)

🔥 दिमासा जनजाति के गौरव, असम के अमर क्रांतिवीर

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जनजाति समाज का योगदान अत्यंत प्रेरणादायी रहा है। उत्तर-पूर्व भारत, विशेषकर असम के दिमासा क्षेत्र में अंग्रेजों के अत्याचारों के विरुद्ध संघर्ष का नेतृत्व करने वाले वीर पुरुष थे शंभुधन फुंगलो।

🗓 जन्म: 1850, माइबंग (उत्तर कछार पर्वतीय जिला, असम)
🗓 बलिदान: 12 फरवरी 1883 (आयु मात्र 33 वर्ष)

बाल्यकाल से ही आध्यात्मिक प्रवृत्ति के शंभुधन भगवान शिव के परम भक्त थे। परंतु जब उन्होंने अंग्रेजों द्वारा दिमासा क्षेत्र को विभाजित कर कमजोर करने और प्रजा पर अत्याचार करने की नीति देखी, तो उनके भीतर क्रांति की ज्वाला प्रज्वलित हो उठी।

12 फरवरी 1883 को वे वीरगति को प्राप्त हुए, परंतु उनका साहस और स्वाभिमान आज भी प्रेरणा देता है।

✨ जनजाति समाज ने कभी गुलामी स्वीकार नहीं की — शंभुधन फुंगलो इसका ज्वलंत उदाहरण हैं।

🙏 आइए, उनके बलिदान दिवस पर हम संकल्प लें कि अपने इतिहास और वीरों की गाथा को जन-जन तक पहुँचाएँ।

🇮🇳 वीर शंभुधन फुंगलो अमर रहें!

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