विविधता में एकता यह अपने भारत की प्रमुख विशेषता है। विभिन्न जाति, पंथ – संप्रदाय, भाषा – वेशभूषा होते हुए भी एक आंतरिक सूत्र ने भारत जैसे विशाल देश को एकत्रित बांधने का काम किया है। देश की इसी सुंदरता को सुशोभित किया है अपने जनजाति समाज ने…!
वर्तमान में भारत में 12 करोड़ से अधिक जनजाति समाज निवास करता है। देश के सुदूर वनों – पर्वतों में रहने वाला जनजाति समाज अपनी भारतीय परंपरा और संस्कृति का सच्चा संरक्षक है। भारत की संस्कृति का अभिन्न घटक होते हुए भी दुर्भाग्य से जनजाति समाज घोर उपेक्षा का शिकार हुआ।